Thursday, 21 July 2011

देश को एक खतरनाक कानून से बचाएं:



एक अलोकतांत्रिक, साम्प्रदायिक व देश के बहुसंख्यक समाज के ऊपर दमनकारी कानून - 


2011(‘Prevention of Communal and Targeted Violence (Access to Justice and Reparations) Bill,2011’)     सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम (न्याय एवं क्षतिपूर्ति) विधेयक                                                                            को जानें तथा एक व्यापक जन जागरण कर इसे संसद में पारित होने से रोकें:
इसमें माना है कि सांप्रदायिक समस्या केवल बहुसंख्यक 
समुदाय के सदस्य ही पैदा करते है। 
अल्पसंख्यक समुदाय का कोई व्यक्ति इसके लिए जिम्मेदार नहीं है।
बहुसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के खिलाफ किए गए 
सांप्रदायिक अपराध तो दंडनीय है, किंतु अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों द्वारा बहुसंख्यकों के खिलाफ 
किए गए सांप्रदायिक अपराध दंडनीय नहीं है।
ऐसा इसलिए है, क्योंकि समूह की परिभाषा में बहुसंख्यक समुदाय के व्यक्तियों को शामिल नहीं 
किया गया है। बहुसंख्यक समुदाय का कोई व्यक्ति सांप्रदायिक हिंसा का शिकार नहीं हो सकता है।
अभियुक्त बहुसंख्यक समुदाय के ही होंगे। अधिनियम का अनुपालन एक ऐसे प्राधिकरण संस्था द्वारा 
किया जाएगा जिसमें निश्चित ही बहुसंख्यक समुदाय के सदस्य नगण्य या अल्पमत में होंगे।
पीड़ित के बयान केवल धारा 164 के तहत होंगे अर्थात अदालतों के सामने। यदि किसी व्यक्ति के ऊपर 
घृणा संबंधी प्रचार का आरोप लगता है तो उसे तब तक एक पूर्वधारणा के अनुसार दोषी माना जाएगा 
जब तक वह निर्दोष नहीं सिद्ध हो जाता। साफ है कि आरोप सबूत के समान होगा।
मुकदमे की कार्यवाही चलवाने वाले विशेष लोक अभियोजक सत्य की सहायता के लिए नहीं, बल्कि 
पीड़ित के हित में काम करेंगे।
शिकायतकर्ता पीडि़त का नाम और पहचान गुप्त रखी जाएगी। केस की प्रगति की रपट पुलिस 
शिकायतकर्ता को ही बताएगी।
एक गैर हिन्दू महिला के साथ किए गए दुर्व्यवहार को तो अपराध मानता है; परन्तु हिन्दू महिला के 
साथ किए गए बलात्कार को अपराध नहीं मानता जबकि साम्प्रदायिक दंगों में हिन्दू महिला का शील 
ही विधर्मियों के निशाने पर रहता है।
अल्पसंख्यक वर्ग के किसी व्यक्ति के अपराधिक कृत्य का शाब्दिक विरोध भी इस विधेयक के 
अन्तर्गत अपराध माना जायेगा। यानि अब अफजल गुरु को फांसी की मांग करना, बांग्लादेशी 
घुसपैठियों के निष्कासन की मांग करना, धर्मान्तरण पर रोक लगाने की मांग करना भी अपराध बन 
जायेगा।
भारतीय संविधान की मूल भावना के अनुसार किसी आरोपी को तब तक निरपराध माना जायेगा जब 
तक वह दोषी सिद्ध न हो जाये; परन्तु, इस विधेयक में आरोपी तब तक दोषी माना जायेगा जब तक 
वह अपने आपको निर्दोष सिद्ध न कर दे। इसका मतलब होगा कि किसी भी गैर हिन्दू के लिए अब 
किसी हिन्दू को जेल भेजना आसान हो जायेगा। वह केवल आरोप लगायेगा और पुलिस अधिकारी 
आरोपी हिन्दू को जेल में डाल देगा।
यदि किसी संगठन के कार्यकर्ता पर साम्प्रदायिक घृणा का कोई आरोप है तो उस संगठन के मुखिया 
पर भी शिकंजा कसा जा सकता है।
संगठित सांप्रदायिक और किसी समुदाय को लक्ष्य बनाकर की जाने वाली हिंसा इस कानून के तहत 
राज्य के भीतर आंतरिक उपद्रव के रूप में देखी जाएगी। इसका अर्थ है कि केंद्र सरकार ऐसी दशा में 
अनुच्छेद 355 का इस्तेमाल कर संबंधित राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने में सक्षम होगी। यदि 
प्रस्तावित बिल कानून बन जाता है तो केंद्र सरकार राज्य सरकारों के अधिकारों को हड़प लेगी।
विधेयक अगर पास हो जाता है तो हिन्दुओं का भारत में जीना दूभर हो जायेगा। देश द्रोही और हिन्दू 
द्रोही तत्व खुलकर भारत और हिन्दू समाज को समाप्त करने का षडयन्त्र करते रहेंगे; परन्तु हिन्दू 
संगठन इनको रोकना तो दूर इनके विरुध्द आवाज भी नहीं उठा पायेंगे। हिन्दू जब अपने आप को 
कहीं से भी संरक्षित नहीं पायेगा तो धर्मान्तरण का कुचक्र तेजी से प्रारम्भ हो जायेगा। इससे भी 
भयंकर स्थिति तब होगी जब सेना, पुलिस व प्रशासन इन अपराधियों को रोकने की जगह इनको 
संरक्षण देंगे और इनके हाथ की कठपुतली बन देशभक्त हिन्दू संगठनों के विरुध्द कार्यवाही करने के 
लिए मजबूर हो जायेंगे।
यूपीए अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्यक्षा के नाते एक केविनेट 
मंत्री के बराबर दर्जे का वेतन, भत्ते तथा स्टेट्स के साथ सुख सुविधाएं पा रही हैं । इसी परिषद ने यह 
विधेयक तैयार किया है। इसके सदस्यों और सलाहकारों में हर्ष मंडेर, अनु आगा, तीस्ता सीतलवाड़, 
फराह नकवी जैसे हिन्दू विद्वेषी तथा सैयद शहाबुद्दीन, जॉन दयाल, शबनम हाशमी और नियाज 
फारुखी जैसे घोर साम्प्रदायिक शक्तियों के हस्तक हों तो विधेयक के इरादे क्या होंगे, आसानी से आप 
इसकी कल्पना कर ही सकते हैं। इन सब को भी प्रधान मंत्री कार्यालय के माध्यम से धन राशि मिलती 
है।
देश के समस्त पूज्य संतों, राजनीतिज्ञों, प्रबुध्द वर्ग तथा राष्ट्र भक्त हिन्दू समाज से अनुरोध है कि 
केन्द्र सरकार के इस पैशाचिक विधेयक को रोकने के लिए सशक्त प्रतिकार करें।

1 comment:

  1. yehi hai, yehi hai vo adhiniyam jo is desh ki janta ka is sarkaar se mohbhang karnewala hai aur is sarkaar ko iska sahi sthaan bata dega.
    ye kans ( congress ) dwaara sri krishna ( hindus ) ko maarne ke liye bheje jaane wale dusht saadhan maatra hain, ye to maare hi jaayenge lekin is sarkaar yaane kans ka jaana bhi is bill ke baad tay hai,

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